छत्तीसगढ़ के बारे में

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छत्तीसगढ़ के जलप्रपात

शीर्षक, छत्तीसगढ़ के जलप्रपात

छत्तीसगढ़ अंचल प्राकृतिक सुंदरता के मामले में समृद्धशाली है। यहाँ की नदियां कई सुन्दर जलप्रपात बनाती है। देश में चार प्रवाह क्रम हैं। इन्हें

  • गंगा प्रवाह,
  • महानदी प्रवाह,
  • गोदावरी प्रवाह
  • और नर्मदा प्रवाह
  • कहते हैं । पहले जानते इन प्रवाह क्रमों में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं ।
    गंगा प्रवाह क्रम: पूर्व सरगुजा, कोरिया,जशपुर,बगीचा व बिलासपुर की पेंड्रा तहसील इत्यादि आते हैं।
    महानदी प्रवाह तंत्र : इसका विस्तार मुख्यतः धमतरी, महासमुंद,राजनांदगाँव, कर्वधा, राजिम,जाँजगीर-चांपा,रायगढ़ जिले में मिलता है।प्रदेश का 55.51 प्रतिशत क्षेत्रों में इसका प्रवाह है। ।
    गोदावरी प्रवाह तंत्र इसका विस्तार दण्डकारण्य क्षेत्र में है। यानि कांकेर, बस्तर व दंतेवाड़ा जिले इस प्रवाह के अंतर्गत आते हैं।
    नर्मदा प्रवाह तंत्र : कर्वधा तहसील में इसका विस्तार है।

    छत्तीसगढ़ के जलप्रपात के इन्ही चार जल प्रवाह के अंतर्गत आने वाली नदियों पर बनते हैं। जब जल की विशालकाय बहाव ऊँचाई से नीचे गिरती है इसे जलप्रपात कहते हैं। छत्तीसगढ़ के जलप्रपात के इन्ही चार जल प्रवाह के अंतर्गत आने वाली नदियों पर बनते हैं। प्रदेश में मौजूद जलप्रपातों का आनन्द सितम्बर से मई के बीच लिया जा सकता है । बस्तर में मौजूद चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रतात की ख्याति देश भर में है। चित्रकोट जलप्रपात को मिनी नियाग्रा की संज्ञा दी गई है। छत्तीसगढ़ के जलप्रपात के इन्ही चार जल प्रवाह के अंतर्गत आने वाली नदियों पर बनते हैं। जब जल की विशालकाय बहाव ऊँचाई से नीचे गिरती है इसे जलप्रपात कहते हैं। प्रदेश में मौजूद जलप्रपातों का आनन्द सितम्बर से मई के बीच लिया जा सकता है । बस्तर में मौजूद चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रतात की ख्याति देश भर में है। चित्रकोट जलप्रपात को मिनी नियाग्रा की संज्ञा दी गई है। प्रदेश के प्रमुख जलप्रपातों निम्न लिखित प्रपात आते है।

    रानी दाह जलप्रपात

    यह जशपुर से 15 किमी दूर है। ईचकेला और टुकुटोली होते हुए यहाँ पहुँचा जा सकता है। कहते है उड़िसा की किसी रानी ने यहाँ आत्महत्या की थी इसीलिए इसे रानी दाह कहा जात है। इस प्रपात के पास ही महाकालेश्वर का मंदिर है। यह जलप्रपात जून से फरवरी तक पर्यटकों से भरा रहता है। इसकी गुफाओं और इसकी सरणि की ट्रेकिंग का आनन्द गर्मियों में लिया जाता है। यहां से एक किमी दूरी पर पंचभैया नामक एतिहासिक स्थल मौजूद है। रानीदाह प्रपात के कुछ आगे बिहार की राम रेखा की प्रसिद्ध गुफाएं है। और एक पुराने मंदिर में जाने का मार्ग है। इसीलिए रानीदाह की महत्ता काफी है।

    राजपुरी जलप्रपात

    जशपुर के बगीचा से मात्र तीन किमी दूर राजपुरी जलप्रपात स्थित है। यह एक नाले पर आधारित है। गर्मियों में भी इसकी सुंदरता बनी रहती है। जून से लेकर जनवरी तक इसकी सुंदरता बेमिसाल रहती है। स्थानीय प्रशासन ने इसे एक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। दमेरा जलप्रपात यह जलप्रपात जशपुर से 8 किमी दूर है। इसके समीप एक हनुमान मंदिर है इसे जून के अंत से दिसम्बर तक देखा जा सकता है।

    रक्सगण्डा जलप्रपात

    यह सरगुजा जिले के चांदी थाना एवं बंगली नामक स्थान के पास है। यहाँ एक नदी बहती है जिसका नाम है रेंड नदी यही नदी यह जलप्रपात का निर्माण करती है। यह सकरे कुण्ड का निर्माण करती है जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। इसी कुण्ड से एक सरंग निकलती है जो लगभग 100 मीटर तक दूरी तक जाती है। यह सुरंग जहाँ खत्म होती है वहाँ एक गड्डा बना गया है जिसमें से रंग-बिरंगा पानी निकलता है। अपनी इसी खूबियों के कारण रक्तगण्डा जलप्रपात पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    अमृतधारा जलप्रपात

    मनेन्द्रगढ़ तहसील के बरबसपुर नामक स्थान से 10 किमी दूर है यह जलप्रपात । अम्बिकापुर से इसकी दूरी लगभग 120 किमी है। कोरिया की पहाड़ियों से निकलने वली इसदो नदी मनेन्द्र गढ़ तहसील में इस जलप्रपात का निर्माण करती है।

    कोठरी जलप्रपात

    यह जलधारा कोरिया जिले में है। यह अंबिकापुर कुसमी मार्ग पर 70 किमी की दूरी पर स्थित है जहाँ डीपाडीह नामक दर्षनीय स्थल मौजूद है। यहाँ से 15 किमी उत्तरी दिषा में कोठरी जलप्रपात है।

    कन्दई जलप्रपात

    कोरबा बिलासपुर अंबिकापुर सड़क मागर्् पर कटघोरा से लगभग 50 किमी दूर है। यहाँ पहाड़ी नदी 200 फीट की ऊँचाई से नीचे गिरकर एक विषालकाय जलप्रपात का निर्माण करती है। इस जलप्रपात का नजारा पास ही मौजूद एक विषाल षिलाखण्ड से देखा जा सकता है। जलप्रपात पर नीचे उतरकर भी इसका नजार देखा जा सकता है।

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    तामड़ घुमड़

    जगलपुर बस्तर जिले में यह जल प्रपात है । चित्रकूट जलप्रपात के नजदीक ही यह मौजूद है और यह मारडूम के पास चित्रकूट से 15 किमी दूर है। 125 फीट से पानी का गिरना एक आकर्षक नजारा प्रर्दषित करता है। यह जलप्रपात का आनन्द लेने के लिए जून से अक्टूबर महिने में काफी संख्या में लोग आते हैं।

    चित्रकोट जलप्रपात

    यह बस्तर जिले के जिले मुख्यालय जगदलपुर से 45 किमी दूर दक्षिण पष्चिम में स्थित है। इसे छत्तीसगढ़ पर्यटन मंत्रालय मिनी नियाग्रा की संज्ञा देती है। ये घोड़े की नाल जैसी इसी आकृति है। और 100 फीट नीचे बहती है । इसके आसपास रहने ठहरने के लिए पीडब्ल्युडी विभाग ने एक रेस्ट हाउस का निर्माण किया है। जून से अक्टूबर के बीच यह प्रपात बेहद खूबसूरत नजर आता है। बस्तर जिले में इसके अलावा कई जलप्रपात मौजूद है जिसकी खूबसूरती निहारने साल भल दूर-दूर से लोग आते है। वे जलप्रपात हैं
  • तीरथगढ़, मेंदरी घूमर, चित्रधारा, तीरथगढ़,चित्रधारा, महादेव घूमर, कांगेर धारा, गुप्तेष्वर ,तोकापाल का मण्डवा
  • दंतेवाड़ा का बोग्तुम जलप्रपात,हांदावाड़ा या मिल्कुलवाड़ा, मल्गेर, इदुल, सातधार बारसूर, पुलपाड़, सुकमा जिले का रानी दरहा ।
  • बस्तर जिले के जलप्रपातों के बारे में विस्तार से जानिए क्लिक कीजिए लिंक पर

    बस्तर संभाग के जलप्रपात

    मलाज कुण्डलम

    यह जलप्रपात कांकेर जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर south-west में मौजूद है। यह प्रताप दूध नदी का उद्गम स्थल भी है

    चुर्रेमुर्रे झरना

    नारायणपुर से अंतागढ़-आमाबेड़ा बनमर्ग पर अंतागढ़ से 12 किमी दूर पिंजाड़िन घाटी में यह झरना है। north-west direction में यह कई कुण्डों का निर्माण करता है। फिर दक्षिण दिषा में लम्बी दूरी तय करने के बाद इंद्रवती की सहायक नदी कोटरी नदी में यह मिल जाता है।

    खुरसेल झरना

    अंग्रेजों के जमाने से अपनी नैसर्गिक वन सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध था यह झरना। यह नारायणपुर से कोयलीबेड़ा होते हुए खुरसेल घाटी में प्रवेष करता है। खुरसेल घाटी से 9 किमी दूर यह झरना लगभग 400 फीट ऊँचाई से तेज ढाल पर कई खण्डों में रूक-रूक कर कई कुण्डों का निर्माण करता है। इसके आसपास पाषाणीय सुंदरता देखते ही बनती है। वर्तमान में नक्सली गढ़ होने के कारण यहाँ आवागमन अवरूद्ध है।

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