छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल

छत्तीसगढ़ के मंदिरों की एक झलक:

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छत्तीसगढ़ का खजुराहो, भोरम देव मंदिर की एक झलक

छायाकार: अभिषेक ठाकुर जगदलपुर.


भोरमदेव मंदिर

भोरमदेव मंदिर यह कबीर धाम जिले का प्रमुख पर्यअन स्थल है। इसके स्थापत्य कला की उत्कृष्टता के कारण इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण फणिनाग वंश के राजा गोपाल देव ने 1089 ई. में करवाया था। यह नागर शेली में बनाया गया है। इस मंदिर की दीवों पर हाथी, घोड़े, नटराज, गणेश की मूर्तियाँ बनी हैं। भेरमदेव का मन्दिर छत्तीसगढ़ की स्थापत्य कला एवं मूर्ति कला का अनूठा उदाहण प्रस्तुत करता है।

राजीव लोचन मंदिर

यह मंदिर राजिम में है। जिसका निर्माण नलवंशी शासक विलासतुंग ने कराया था। यह पंचायतन शैली में निर्मित विष्णु भगवान का मंदिर है।

दंतेश्वरी देवी मंदिर

यह मंदिर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में मौजूद है। इस मंदिर का निर्माण काकतीय नरेश अन्नमदेव ने कराया था। मंदिर के गर्भगृह में महिषासुरमर्दिनी की भव्य प्रतिमा है। यह दंतेवाड़ा जिले के शंखनी और डंकनी नदी के संगम पर मौजूद है। साथ ही इसके भैरवबाबा का मंदिर भी है जो काफी प्रसिद्ध है।इस मंदिर का निर्माण काकतीय नरेश अन्नमदेव ने कराया था। मंदिर के गर्भगृह में महिषासुरमर्दिनी की भव्य प्रतिमा है। यह दंतेवाड़ा जिले के शंखनी और डंकनी नदी के संगम पर मौजूद है। साथ ही इसके भैरवबाबा का मंदिर भी है जो काफी प्रसिद्ध है। एतिहासिक महत्व का इस मंदिर में दूर-दूर से दर्शन के लिए लोग आते है। एतिहासिक महत्व का इस मंदिर में दूर-दूर से दर्शन के लिए लोग आते है। यह शंखनी तथा डंकनी नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है।

डिडनेश्वरी तथा पातालेश्वर मंदिर

बिलासपुर जिले के मल्हार में यह दोनों मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में भगवान विष्णु की चर्तुभुजी प्रतिमा है जो अव्यवस्थित है। ऐसा माना जाता है कि इन मूर्तियों का निर्माण मौर्य काल में किया गया था।

देवरानी-जेठानी मंदिर

बिलासपुर जिले तालागाँव में यह मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर एक दूसरे से 15 किमी के फासले पर बने हैं

मामाभांजा मंदिर

यह बस्तर संभाग में दंतेवाड़ा जिले के बारसूर में है। यह मंदिर प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में माना जाता है।
साथ ही यहां भगवान गणेश की विशालकाय प्रतिमा है जो पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है।

माँ बम्बेलश्वरी देवी मंदिर

यह मंदिर डोगरगढ़ में है । राज्य की ऊँची चोटी पर स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा वीरसेन ने कराया था। डोगरगढ़ में बम्बलेश्वरी के दो मंदिर हैं। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर को बड़ी माता तथा नीचे स्थित मंदिर को छोटी माता का मंदिर कहा जाता है। बम्बलेश्वरी को हाल ही में राष्ट्रीय पर्यटन स्थल का दर्जा मिला है।

Script,
Upendra's blog