Festivals of Chhattisgarh

The page shares information about Chhattisgarh:

Home About us Contact

छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाले त्यौहार

भारत त्यौहारों का देश है । यहाँ हर अवसर को एक त्यौहार के रूप में मनाने का चलन है । फसल कटाई से लेकर अनेक प्रकार के धार्मिक कार्यो में उत्सव मनाया जाता है। जानते है छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाले त्यौहारों के बारे में

छेरछेरा

बच्चे इस त्यौहार में नए फसल से प्राप्त होने वाले अनाज मांगते है। और कुछ दिन के बाद उस अनाज का भोजन तैयार कर आपस में बांट कर खाते है। इस दौरान वे अनोखी वेशभूषा में अपने आप-पास घरों में जाकर दरवाजे पर लोक गीत या कोई मनोरंजक गीत गाकर अनाज रूपय पैसा मांगते है। यह आमतौर शाम से शुरू किया जाता है और अंधेरा होने पर समाप्त हो जाता है। यह पौष माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है ।

धेरसा

यह त्यौहार कोरबा में आदिवासी मानते है जब सरसों दाल आदि की फसल कट कर तैयार होती है । यह त्यौहार जनवरी यानि पौष माह में मनाया जाता है।

मेघनाद

फागुन महिने यानि मार्च-अप्रेल में गोड़ जनजाति के लोग मेघनाद पर्व मनाते हैं। रावण के पुत्र मेघनाथ को गोंड अपना देवता मानते हैं । और इसकी पूजा करते हैं। इस त्यौहार में जनजाति के लोग पाँच खम्बों का एक खम्ब बनाते हैं जिसे मेघनाथ खम्ब कहते हैं और इसकी पूजा अर्चना करते हैं। गोंड जनजाति के लोग विपदाओं विजय पाने का प्रतीक के रूप में यह पर्व मानते हैं ।

नवरात्रि

यह पर्व बस्तर ,दंतेवाड़ राजनांदगाँव (बम्बलेश्वरी) बिलासपुर स्थित महामाया मंदिर इत्यादि में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र नवरात्र यानि मार्च-अप्रेल और अश्विन सितम्बर-अक्टूबर में मनाया जाता है।

सरहुल

सरगुजा में उराँव जनजाति के लोग इस पर्व को मार्च अप्रेल महिने में मनाते हैं। त्यौहार में सूर्य और पृथ्वी का प्रतिकात्मक विवाह किया जाता है। और मुर्गे की बलि दी जाती है।

अक्षय तृतीया

इसे अक्ति भी कहते है। यह पर्व अप्रेल- मई महिने शुल्क पक्ष तृतीय में मनाया जाता है। इस पर्व से ही खेतों में बीज बोना शुरू किया जाता है। इसे अक्खा तीज भी कहते हैं

करमा

उराँव और सरगुजा की जनजाति इस त्यौहार को हरियाली के स्वागत करने के लिए मनाते हैं। यह पर्व भाद्र महिने में मनाया जाता है। इस पर्व में किए जाने वाले नृत्य को करमा कहते हैं।

गोंचा

यह मुख्य रूप से जगदलपुर में मनाया जाता है। बस्तर जिले में यह त्यौहार जून-जुलाई के महिनों में मनाया जाता है । भगवान जगन्नाथ की मूतियों को इस पर्व में एक विशालकाय रथ में रखा जाता है ओर पूरे 9 दिनों तक जगदलपुर के प्रमुख जगहों पर इसे घुमाया जाता है और 10 वें दिन पुनः मंदिर में स्थापित किया जाता है।

Croissant

हरेली

यह किसनों के द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार जुलाई-अगस्त के महिने में मनाया जाता है और अमावस्या के दिन सभी प्रकार के कृषि यंत्रों की पूजा अर्चना की जाती है। इस अवसर पर गेड़ी में नृत्य किया जाता है जिसे गेड़ी नृत्य कहते है। गेड़ी नृत्य छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार है। बच्चे गेड़ी बनाकर घूमते व नाचते हैं। इस पर्व में जादू-टोने की भी काफी मान्यता होती है। राऊत और लोहार जाति के लोग इसे विशेष रूप मनाते हैं। राऊत जाति के लोग नीम की टहनियों को तथा लोहार जाति के लोग लोहे की पाती दरवाजे पर लगाते हैं।

नाग पंचमी

श्रावण महिने जुलाई -अगस्त के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन यह मनाया जाता है। जांजगीर-चांपा में दलहा पहाड़ में मेला लगता है। और कुश्ती का आयोजन किया जाता है।

पोला पाटन

अगस्त-सितम्बर में किसानों द्वारा इसे मनाया जाता है। इस त्यौहार में मिट्टी के बैल और पोला बनाकर यह त्यौहार मनाते हैं। बैलों को सजाकर बैल दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।

कोरा

यह कोरबा आदिवासियों द्वारा कुटकी गोदली की फसल काटने के बाद अगस्त-सिम्बर के बाद मनाया जाता है।

दीपावली

देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ दीपावली कार्तिक महिने यानि अक्टूबर नवम्बर में मनाई जाती है। इसमें धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है । भगवान राम के अध्योध्या लौटने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। गोधन की समृद्धि की कामना में यह पूजा की जाती है। राज्य में इस अवसर पर गोबर की आकृतियां बनाई जाती है उसे एक रस्म-रिवाज के रूप में पशुओं के खुरों से कुचलवाया जाता है।

नवाखानी

नई फसल पकने और तैयार होने के उपलक्ष्य पर यह त्यौहार मनाया जाता है। यह त्यौहार अक्टूबर-नवम्बर में दीपावली के बाद ही मनाया जाता है। बस्तर में गोंड अपने पूर्वजों को इस दिन अनाज या शराब भेंट करते हैं । इस त्यौहार के बाद ही आदिवासी नई फसल उपयोग करते हैं।

दियारी

दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है । इसमें बैलों को खिचड़ी खिलाकर पूजा अर्चना की जाती है। बस्तर में माड़िया जनजाति के लोग इसे मनाते हैं । इस अवसर पर वे विधिवत फसलों की पूजा की जाती है।

माटी तिहार

दीपावली के बाद बस्तर में पृथ्वी की पूजा की जाती है। बस्तर में यह त्यौहार प्रमुख रूप से मनाया जाता है। दीपावली के बाद मनाए जाने वाले त्यौहारों की लम्बी फेहरिस्त है जैसे राउत लोगों द्वारा मनाया जाने वाला मातर त्यौहार

मातर त्यौहार

वे पारंपरिक वेशभूषा में लाठियाँ लेकर नृत्य करते हैं लकड़ी से बने कुल देवता यानि खोडहर देव की पूजा की जाती है।

बीज बोहनी

यह त्यौहार कोरबा जनजाति का महत्वपूर्ण पर्व है। लोग कृषि के दौरान इस पर्व को काफी उत्साह से मनाते है।

करसाड़ पर्व

इस पर्व में अबूझमाड़ के नवयुवक-नवयुवतियां अपने जीवनसाथी का चुनाव करते हैं। इस पर्व में गाए जाने वाले गीत को ककसार कहते हैं।

आमा तिहार

छत्तीसगढ़ में गोंड जनजाति के लोग यह त्यौहार मनाते हैं। आम के फल लगने पर यह त्यौहार मनाया जाता है।

Croissant
Croissant

हलषष्ठी

अगस्त-सिम्बर के कृष्ण पक्ष में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस पर्व में माताएं अपने पुत्र की लम्बी आयु के लिए व्रत रख्ती हैं। एक तय जगह पर छोटे गड्डे बनाकर तालाब के प्रतीक स्वरूप इसकी पूजा की जाती है। इस अवसर पर घर के बुजुर्ग कहानी किस्से के माध्यम से लोगों प्रेरणास्पद कहानियाँ सुनाते हैं इसमें माताएं शिव पार्वती की पूजा की जाती है।

दशहरा

छत्तीसगढ़ के बाकि हिस्सों में इसे राम की रावण पर विजय के स्वरूप में मनाया जाता है। मगर बस्तर में इसे महाराजा दलपत देव के बस्तर आगमन को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है इसके विधिविधान अलग हैं। यह पर्व 75 दिनों तक चलता है। बस्तर दशहरा के मनाए जाने के कारणों को जानने के लिए क्लिक कीजिए

तीजा

तीजा इस त्यौहार में विवाहित लड़कियों को उसके ससुराल से माता पिता मायके लाते हैं यह त्यौहार अगस्त -सितम्बर में भाद्र माहिने में मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाएँ निर्जला उपवास रखती हैं और शिव -पार्वती की पूजा करते है। और पूजा के बाद महिलाएँ अपना व्रत तोड़ती है। पति और परिवार की सलामती के लिए यह व्रत किया जाता है ।